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इस्लाम में शादी (निकाह) की अहमियत और फायदे – कुरआन और सही हदीस की रोशनी में

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  निकाह (शादी) की अहमियत और फायदे – कुरआन और हदीस की रोशनी में प्रस्तावना इस्लाम में शादी (निकाह) को सिर्फ़ एक सामाजिक ज़रूरत नहीं बल्कि इबादत भी माना गया है। इंसान को अल्लाह ने जो फितरत दी है, उसमें ममता, मोहब्बत और परिवार की अहमियत शामिल है। शादी उसी फितरत को मुकम्मल करने का एक हसीन जरिया है। कुरआन और हदीस में शादी के बेशुमार फायदे बताए गए हैं और इसे उम्मत के लिए रहमत करार दिया गया है। कुरआन में शादी की अहमियत कुरआन-ए-करीम में अल्लाह तआला ने कई जगहों पर निकाह का जिक्र किया है। 1. सुकून और मोहब्बत का जरिया > “और उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हारे लिए तुम्हीं में से जोड़े बनाए, ताकि तुम उनके पास सुकून पाओ, और उसने तुम्हारे बीच मोहब्बत और रहमत पैदा की।” (सूरह अर-रूम, 30:21) यह आयत साफ़ बताती है कि शादी का असल मक़सद इंसान को सुकून, मोहब्बत और रहमत अता करना है। इससे साबित होता है कि शादी इंसान को गुनाहों और नाजायज़ रिश्तों से बचाती है। 2. गुनाहों से बचाव कुरआन में अल्लाह फरमाता है: > “और तुममें से जो अविवाहित हों और तुम्हारे नेक बंदों और बंदियों में से जो योग्य हों, उनका ...