इस्लाम में तलाक का हकीकत: कुरआन और सही हदीस की रोशनी में तलाक का तरीका, हिकमत और हक़
तलाक क्या है? (Introduction) इस्लाम एक मुकम्मल ज़िंदगी का निज़ाम है, जिसमें इंसान की हर ज़रूरत और मसले का हल मौजूद है। शादी (निकाह) इंसानी समाज की बुनियाद है। मगर कभी-कभी हालात ऐसे बन जाते हैं कि पति-पत्नी साथ नहीं निभा पाते। ऐसे वक़्त में इस्लाम ने तलाक (तलाक़) का रास्ता रखा है, ताकि ज़िंदगी को नर्क बनाने के बजाय शरीयत के मुताबिक़ अलग हुआ जा सके। लेकिन यह भी याद रखना ज़रूरी है कि इस्लाम तलाक को पसंद नहीं करता। हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया: > “हलाल चीज़ों में सबसे नापसंद चीज़ अल्लाह के नज़दीक तलाक है।” (अबू दाऊद, हदीस: 2178) तलाक का हिकमत और मक़सद तलाक का मक़सद पति-पत्नी की ज़िंदगी को बर्बाद करना नहीं, बल्कि उनको बेवजह की तकलीफ़ से बचाना है। अगर दो लोग एक-दूसरे के साथ रहकर खुशहाल नहीं हो पा रहे, तो अलग हो जाना बेहतर है। क़ुरआन में अल्लाह तआला फ़रमाता है: > “अगर दोनों एक-दूसरे से अलग हो जाएं, तो अल्लाह अपनी रहमत से दोनों को बेनियाज़ कर देगा।” (सूरह अन-निसा 4:130) तलाक के बारे में गलतफहमियाँ 1. गलतफहमी: लोग समझते हैं कि इस्लाम में तलाक बहुत आसान है। हकीकत: इस्लाम तलाक को आखिरी ...